Saturday, August 1, 2009

मज़ा ही कुछ और है

दाँतों से नाख़ून काटने का,
छोटों को ज़बरदस्ती डाँटने का,
पैसे वालों को गाली बकने का,
मूँगफली के ठेले से मूँगफली चखने का,
कुर्सी पर बैठ कर कान में पेन डालने का,
डीटीसी की बस की सीट में से स्पंज निकालने का
मज़ा ही कुछ और है |

एक ही खूँटी पर ढ़ेर सारे कपड़े डालने का,
नये साल पे दुकानदार से कलेंडर माँगने का,
चलती रेल में चढ़ने का,
दूसरों की चिट्ठी पढ़ने का,
माँगे हुए स्कूटर को तेज़ भगाने का,
खुद को नींद नहीं आने पर पत्नी को जगाने का,
मज़ा ही कुछ और है |

चोरी से फल को तोड़ने का,
खराब ट्यूबलाइट और मटकों को फोड़ने का,
पड़ोसन को घूर घूर के देखने का,
अपना कचरा दूसरों के सामने फेंकने का,
बाथरूम में बेसुरा गाने का,
थूक से टिकट चिपकाने का,
मज़ा ही कुछ और है |

ऑफीस में लेट आने का,
फाइल को ज़बरदस्ती दबाने का,
चाट वाले से फ़ोकट की चटनी डलवाने का,
बारात में प्रेस किए हुए कपड़ों को फिर से प्रेस कराने का,
ससुराल में साले से पान मंगाने का,
साली की पीठ पर धोल जमाने का,
मज़ा ही कुछ और है |

आरती में सबसे ज़्यादा फटा हुआ नोट चढ़ने का,
दूसरे के मोबाइल फोन से चिपकने का,
पान गुटकों को इधर उधर पिचकने का,
कमजोरों से बेमतलब लड़ने का,
पत्नी को रोज रोज परेशन करने का,
मज़ा ही कुछ और है |

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